भविष्य के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए तापमान-नियंत्रित नैनो-सामग्रियों के रहस्यों का पता चला

शोधकर्ताओं ने यह समझने में एक बड़ी सफलता प्राप्त हुई की है कि छोटे ऑर्गेनिक अणुओं को उन्नत कार्यात्मक सामग्री बनाने के लिए कैसे निर्देशित किया जा सकता है। इससे भविष्य के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, अनुकूलनीय ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों, प्रतिक्रियाशील सामग्रियों और जैव-इलेक्ट्रॉनिक इंटरफेस के विकास में मदद मिल सकती है।

बेंगलुरु स्थित सेंटर फॉर नैनो एंड सॉफ्ट मैटर साइंसेज (सीईएनएस) की टीम ने जवाहरलाल नेहरू उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र (जेएनसीएएसआर) के सहयोग से, नेफथलीन डाइमाइड (एनडीआई) का अध्ययन किया, जो एक उभयपरक अणु है जिसमें सुपरमॉलिक्यूलर सेल्फ-असेंबली नामक प्रक्रिया के माध्यम से पानी में खुद को व्यवस्थित करने की अनूठी क्षमता होती है। ये दोनों भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के अधीन स्वायत्त संस्‍थान हैं।

उभयपरक अणु असंयोजक अंतःक्रियाओं के माध्यम से एक साथ आते हैं और सुस्पष्ट नैनो-संरचनाएं बनाते हैं। नियंत्रित की जा सकने वाली ऐसी संरचनाएं इलेक्ट्रॉनिक्स, फोटोनिक्स और जैव-चिकित्सा उपकरणों में उभरते इस्‍तेमाल के लिए महत्वपूर्ण हैं।

अनुसंधानकर्ताओं ने पाया कि कमरे के तापमान पर, ये अणु स्वतः ही छोटे गोलाकार नैनो-संरचनाओं में एकत्रित हो जाते हैं जिन्हें नैनोडिस्क कहा जाता है। ये नैनोडिस्क एक ऐसा प्रकाशीय गुण प्रदर्शित करते हैं जो उन्हें ध्रुवीकृत प्रकाश के साथ एक विशिष्ट तरीके (काइरोप्टिकल गतिविधि) से परस्पर क्रिया करने में सक्षम बनाता है।

गर्म करने पर, नैनोडिस्क की संरचना में बदलाव होता है और वे दो-आयामी नैनोशीट में परिवर्तित हो जाते हैं, जिससे उनकी काइरोऑप्टिकल सक्रियता समाप्त हो जाती है। इससे पता चलता है कि केवल तापमान से ही पदार्थ को विभिन्न संरचनात्मक और प्रकाशीय अवस्थाओं के बीच परिवर्तित किया जा सकता है।

टीम ने यह भी देखा कि नैनोडिस्क काफी अधिक विद्युत चालकता प्रदर्शित करते हैं, जो नैनोशीट्स में बदलने पर लगभग सात गुना कम हो जाती है। यह दर्शाता है कि सामग्री के विद्युत व्यवहार को उसकी सेल्फ-असेंबली प्रक्रिया को नियंत्रित करके सटीक रूप से समायोजित किया जा सकता है। छोटे ऑर्गेनिक अणुओं में इस तरह की समायोजन क्षमता (tunability) बहुत कम देखने को मिलती है।

तापमान का उपयोग करके संरचनात्मक, प्रकाशीय और विद्युत गुणों को गतिशील रूप से समायोजित करने की यह क्षमता स्मार्ट, अनुकूलनीय सामग्रियों के विकास के लिए एक शक्तिशाली मार्ग प्रदान करती है।

अमेरिकन केमिकल सोसाइटी द्वारा प्रकाशित एसीएस एप्लाइड नैनो मैटेरियल्स में हाल ही में प्रकाशित इस अध्ययन में बताया गया है कि नैनोस्केल आणविक व्यवहार को समझना अगली पीढ़ी के कार्यात्मक पदार्थों के डिजाइन को कैसे प्रभावित कर सकता है। आणविक संयोजन को नियंत्रित करने की एक सरल लेकिन प्रभावी विधि का प्रदर्शन करके, यह अनुसंधान सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक्स और स्मार्ट प्रौद्योगिकियों के लिए उन्नत पदार्थों के डिजाइन के नए रास्ते खोलता है।

डॉ. गौतम घोष (सीईएनएस) के नेतृत्व में, उनके पीएचडी छात्र श्री सौरव मोयरा (सीईएनएस) और सहयोगी श्री तारक नाथ दास (जेएनसीएएसआर) द्वारा किए गए अनुसंधान से इंजीनियरों को अत्यधिक अनुकूलनीय और कुशल स्मार्ट सामग्रियों के लिए सुपरमॉलिक्यूलर रसायन विज्ञान के उपयोग में बहुमूल्य अंतर्दृष्टि प्राप्त होती है।

प्रकाशन लिंक: https://doi.org/10.1021/acsanm.5c03598

अधिक जानकारी के लिए, कृपया डॉ. गौतम घोष से gghosh[at]cens[dot]res[dot]in पर संपर्क किया जा सकता है।