घुमाव, उंगलियां और दरारें: वैज्ञानिकों ने बहती हुई मिट्टी में दो आश्चर्यजनक पैटर्न खोजे

अभियंता चट्टानों के भीतर से चिपचिपा तेल निकालने के लिए उनमें ग्लिसरॉल (एक मीठा अल्कोहल जिसका उपयोग खांसी की दवाइयों में किया जाता है) डालते हैं। अब एक नए अध्ययन में विस्थापित मिट्टी के यांत्रिक व्यवहार को नियंत्रित करने की एक नवीन विधि सामने आई है, जो तेल पुनर्प्राप्ति प्रक्रिया को बेहतर ढंग से समझने और मिट्टी के परिवहन में सहायता कर सकती है।

Newtonian Fluid

चित्र 1. नीला रंग न्यूटोनियन द्रव (जल) को दर्शाता है, जो पीले रंग से दर्शायी गई गैर-न्यूटोनियन मिट्टी के भीतर प्रवाहित हो रहा है।

श्यानता किसी द्रव के प्रवाह के प्रतिरोध को दर्शाती है। उदाहरण के लिए शहद तेल से अधिक श्यान होता है और तेल जल से अधिक श्यान होता है। जब कम श्‍यान द्रव, जैसे जल, किसी सीमित स्थान में मिट्टी के सस्‍पेंशन (निलंबन) को विस्‍थापित करता है, तो वो रोचक आकृतियां बनाता है। मिट्टी का सस्‍पेंशन एक गैर-न्यूटोनियन द्रव है, जैसे टूथपेस्ट और मेयोनेज़- ये स्थिर अवस्था में सतह पर उभार बनाए रख सकते हैं। इसके विपरीत, जल जैसे न्यूटोनियन द्रव स्थिर अवस्था में समतल और बिना विशेषताओं वाली सतह रखते हैं।

हालांकि, वैज्ञानिकों ने पहले भी जल द्वारा मिट्टी के विस्थापन से बनने वाले वैश्विक पैटर्न का अध्ययन किया है, लेकिन विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के एक स्वायत्त संस्थान, रामन शोध संस्थान (आरआरआई) के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए वर्तमान अध्ययन में सूक्ष्म संरचनाओं और इन पैटर्न के विकास के तरीके पर विशेष ध्यान दिया गया है।

“हमने उंगलियों (शाखाओं) के प्रसार के नए रूप- जैसे ज़िग-ज़ैग और स्‍क्‍यूअरिंग- को विशेष रूप से रोमांचक पाया। इन रूपों का प्रकट होना अप्रत्याशित था और पूर्ववर्ती अध्ययनों में कभी दर्ज नहीं किया गया था,” आरआरआई की वरिष्ठ प्रोफेसर और इस शोधपत्र की सह-लेखिका रंजिनी बंद्योपाध्याय ने कहा।

zig-zag projection

चित्र 2. बाईं ओर जल की उंगलियों का जि़ग-जैग प्रक्षेपण दर्शाया गया है, जबकि दाईं ओर स्‍क्‍यूअरिंग प्रक्षेपण को दर्शाया गया है- ये उंगली प्रसार के नए रूप हैं, जो इस अध्ययन में देखे गए।

जब जल प्रवाहित होते हुए मिट्टी से टकराता है, तो उनके संपर्क स्‍थल पर 'द्रव प्रवाह अस्थिरता' उत्पन्न होती है, जिसमें द्रव अपने नियमित प्रवाह से विचलित हो जाता है। आरआरआई के पीएचडी छात्र और शोध पत्र के प्रमुख लेखक वैभव राज सिंह परमार ने कहा, “कुछ स्थितियों में अस्थिरता को दबाना आवश्यक होता है, जबकि अन्य में अस्थिरता का उपयोग द्रव मिश्रण को सुगम बनाने के लिए किया जा सकता है। अस्थिरता को नियंत्रित करने के लिए उसे समझना आवश्यक है।”

अपने प्रयोग के लिए वैज्ञानिकों ने सबसे पहले मिट्टी को ओवन में पकाकर उसमें से नमी हटा दी। फिर उन्होंने मिट्टी को जल में मिलाकर उसका सस्पेंशन बनाया। इसके अलावा, उन्होंने डाइमिथाइलफॉर्मैमाइड (डीएमएफ), टेट्रासोडियम पाइरोफॉस्फेट (टीएसपीपी), सोडियम क्लोराइड (यानी साधारण नमक) और केसीएल जैसे योजक पदार्थों को जल में मिलाकर अलग-अलग घोल (विलयन) तैयार किए और फिर उन्होंने प्रत्येक घोल में मिट्टी मिलाकर अलग-अलग सस्पेंशन बनाए।

उन्होंने जिस मिट्टी का इस्तेमाल किया, उसमें एक एनएम मोटाई और 30 एनएम व्यास वाले सिक्के जैसे नैनोकण मौजूद थे। टीएसपीपी जैसे पदार्थ मिट्टी के क्षरण या दरार पड़ने की प्रक्रिया को धीमा करते हैं, जबकि NaCl और KCl तेजी से दरार पैदा करते हैं।

प्रयोग दो कांच की प्लेटों के बीच की संकीर्ण जगह में किए गए, जिसका आकार एक बड़े साइकिल के पहिये जितना था। इस प्लेट के बीच में एक छेद था, जिसके माध्यम से मिट्टी और जल डाला गया। इस व्यवस्था को हेले-शॉ सेल कहा जाता है। जब जल ने मिट्टी को विस्थापित किया, तो केंद्र से बाहर की ओर सुंदर त्रिज्‍जीय मार्गों का एक पैटर्न फैल गया।

बनने वाले पैटर्न मिट्टी की प्रत्‍यास्‍थता पर निर्भर थे। अधिक प्रत्‍यास्‍थ ठोस पदार्थ विकृत होने पर आसानी से अपने मूल आकार में लौट आता है। जब शुद्ध जल में घुली मिट्टी पर जल प्रवाहित हुआ, तो नेटवर्क ‘टिप-स्प्लिटिंग’ द्वारा बढ़ा, जिसमें उंगली का अग्रभाग दो भागों में  विभाजित हो जाता है।

Twists, Fingers and Fractures

चित्र 3. योजक पदार्थों को मिलाने से मिट्टी की प्रत्‍यास्‍थता प्रभावित होती है, जिसके परिणामस्वरूप जल द्वारा मिट्टी को विस्‍थापित करते समय अलग-अलग पैटर्न बनाते हैं।

जब उन्होंने डीएमएफ और टीएसपीपी का उपयोग करके तैयार किए गए मिट्टी के घोल के साथ प्रयोग को दोहराया, जिसमें मिट्टी की प्रत्‍यास्‍थता कम थी, तो मिट्टी के नमूने में वे चैनल जिनके माध्यम से तरल पदार्थ प्रवाहित हो सकते हैं, असमान रूप से वितरित हो गए, जिससे तिरछी और टेढ़ी-मेढ़ी जैसी नई आकृतियां उत्पन्न हुईं।

जब उन्होंने NaCl या KCl से तैयार की गई मिट्टी का इस्तेमाल किया, तो मिट्टी अत्यधिक प्रत्‍यास्‍थ हो गई और एक भंगुर चादर में बदल गई। बंद्योपाध्याय ने कहा “इन परिस्थितियों में नमूना वास्तव में ठोस जैसा हो जाता है। इसलिए जब जल इस अव्यवस्थित ठोस से होकर गुजरने की कोशिश करता है, तो नोक पर बहुत अधिक तनाव उत्पन्न होता है। यह ठीक वैसा ही है जैसे किसी नुकीली वस्तु से कांच के टुकड़े पर प्रहार करना। तब वो दरारों में टूट जाएगा।”

इस प्रकार योजक पदार्थों को मिलाकर वे मिट्टी की प्रत्‍यास्‍थता में परिवर्तन कर पैटर्न को नियंत्रित कर सकते हैं। उनके अध्ययन का उपयोग तेल पुनर्प्राप्ति और पदार्थ परिवहन जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है।

"तेल पुनर्प्राप्ति के दौरान अस्थिरता वांछनीय नहीं होती। जब छिद्रयुक्त चट्टान में मौजूद तेल को ग्लिसरॉल द्वारा विस्थापित किया जाता है, तो उसकी बढ़ती हुई उंगलियां (परतें, शाखाएं) दक्षता को कम कर देती हैं," परमार ने कहा।

प्रो. बंद्योपाध्याय ने कहा, "आप केवल योजक पदार्थ मिलाकर मिट्टी के कणों के परस्‍पर व्‍यवहार को बदल सकते हैं और इससे मिट्टी के परिवहन की पूरी प्रक्रिया बदल सकती है।"

प्रकाशन लिंक: DOI 10.1088/1367-2630/ae27ec

अधिक जानकारी के लिए outreach[at]rrimail[dot]rri[dot]res[dot]in पर संपर्क किया जा सकता है।