“विश्वविद्यालय अनुसंधान एवं वैज्ञानिक उत्कृष्टता संवर्धन (पर्स)” विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की एक प्रमुख अवसंरचना योजना है, जिसे वर्ष 2009 में विशेष रूप से विश्वविद्यालय क्षेत्र हेतु आरंभ किया गया था। इस योजना का मुख्य उद्देश्य उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले भारतीय विश्वविद्यालयों की अनुसंधान क्षमता को सुदृढ़ करना तथा देश के विश्वविद्यालयों में अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र के संवर्धन एवं अनुसंधान और विकास आधार को सशक्त बनाने के लिए आवश्यक सहयोग प्रदान करना है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा वर्ष 2020 में पर्स योजना का पुनर्गठन एवं पुनः अभिमुखीकरण किया गया। पर्स योजना के अंतर्गत विश्वविद्यालयों के चयन हेतु नवीन मानदंड निर्धारित किए गए हैं, जिनके निर्माण में विश्वविद्यालय के संकाय सदस्यों के आई-10 सूचकांक, विश्वविद्यालय के एच-सूचकांक तथा राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग रूपरेखा (एनआईआरएफ) की रैंकिंग का संयुक्त रूप से उपयोग किया गया है। विश्वविद्यालयों को मिशन-आधारित अनुसंधान गतिविधियाँ संचालित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है, जिससे वे उन्नत विनिर्माण, अपशिष्ट प्रसंस्करण, स्वच्छ ऊर्जा, जल संसाधन तथा स्टार्ट-अप इंडिया जैसी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं से संबद्ध प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित अनुसंधान कर सकें। विश्वविद्यालयों को अपनी विशिष्ट उत्कृष्टता के क्षेत्रों को सक्षम एवं अनुभवी टीमों के माध्यम से विषयगत प्रयासों के रूप में विकसित करने के लिए प्रेरित किया गया है, जिनके उद्देश्य स्पष्ट, मापनीय एवं सुव्यवस्थित हों। इस योजना का व्यापक उद्देश्य राष्ट्रीय प्राथमिकताओं एवं मिशनों के अनुरूप संभावित रूप से उच्च प्रभाव उत्पन्न करने वाले अंतर्विषयक अनुसंधान (मौलिक एवं अनुप्रयुक्त दोनों) को प्रोत्साहन एवं समर्थन प्रदान करना है। अनुसंधान गतिविधियाँ आत्मनिर्भर भारत तथा स्टार्ट-अप इंडिया जैसी प्रमुख राष्ट्रीय पहलों के लक्ष्यों के साथ पूर्णतः संरेखित होनी चाहिए। पर्स के अंतर्गत समर्थित विश्वविद्यालयों को सार्वजनिक सूचना के माध्यम से उपलब्ध संसाधनों के इष्टतम एवं प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित करने हेतु निर्देशित किया गया है। पर्स योजना के अंतर्गत कार्यक्रम प्रबंधन बोर्ड, जिसमें प्रतिष्ठित शिक्षाविद सम्मिलित हैं, नवीन प्रस्तावों के मूल्यांकन, स्वीकृत परियोजनाओं की तकनीकी प्रगति की नियमित समीक्षा तथा आवश्यकतानुसार परियोजनाओं में मध्यावधि सुधारात्मक सुझाव प्रदान करने की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से संलग्न रहता है।
समर्थन का स्वरूप:
इस योजना के अंतर्गत अनुसंधान सुविधाओं की स्थापना/अधिग्रहण, अनुसंधान से संबंधित मानव संसाधन लागत, अनुसंधान उपभोग्य सामग्रियों की खरीद, यात्रा व्यय, कार्यशालाओं एवं सम्मेलनों के आयोजन, आकस्मिक व्यय तथा अनुसंधान सुविधाओं के अनुरक्षण एवं रखरखाव हेतु वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। विश्वविद्यालयों को अपनी उत्कृष्टता के क्षेत्रों को स्पष्ट रूप से परिभाषित उद्देश्यों के साथ एक सक्षम टीम द्वारा संचालित अंतर्विषयक विषयगत अनुसंधान प्रयास के रूप में विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इस योजना के अंतर्गत व्यक्तिगत अनुसंधान एवं विकास (अनुसंधान एवं विकास) सहायता से संबंधित प्रस्ताव स्वीकार नहीं किए जाएंगे। अनुसंधान की पारस्परिकता, समन्वय एवं फोकस को यथासंभव राष्ट्रीय मिशनों/राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप संरेखित किया जाना अपेक्षित है।
अवधि
पर्स परियोजना के अंतर्गत प्रदान की जाने वाली सहायता की अवधि चार (4) वर्ष होगी।
पात्रता: यह योजना विशेष रूप से विश्वविद्यालय क्षेत्र के लिए है। अन्य शैक्षणिक संस्थान/आईआईटी/एनआईटी/ आईआईएसईआर/महाविद्यालय इस योजना के अंतर्गत आवेदन करने के लिए पात्र नहीं हैं। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से मान्यता प्राप्त केंद्रीय विश्वविद्यालय, राज्य-वित्तपोषित विश्वविद्यालय, डीम्ड विश्वविद्यालय तथा निजी विश्वविद्यालय इस योजना के अंतर्गत आवेदन करने के पात्र हैं। पात्र विश्वविद्यालय को पिछले पाँच (5) वर्षों में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अथवा किसी अन्य सरकारी स्रोत से 10.0 करोड़ रुपये से अधिक का प्रमुख अनुदान प्राप्त नहीं हुआ होना चाहिए, अथवा उसे स्वीकृति आदेश की तिथि से पूर्व के दस (10) वर्षों में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की एसएआईएफ/साथी/पर्स योजनाओं के अंतर्गत कोई सहायता प्राप्त नहीं हुई होनी चाहिए।
अन्य सभी एजेंसी-आधारित विश्वविद्यालय पर्स योजना के अंतर्गत सहायता के दायरे से बाहर रखे गए हैं।
प्रभाव और पहुँच:
पिछले 15 वर्षों में, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) ने सक्रिय रूप से 91 विश्वविद्यालयों का समर्थन किया, जिनमें शामिल हैं:
- 21 केंद्रीय विश्वविद्यालय
- 54 राज्य विश्वविद्यालय
- 16 निजी विश्वविद्यालय
इन संस्थानों ने मूल और अनुप्रयुक्त विज्ञान दोनों क्षेत्रों में उच्च प्रभाव वाले अनुसंधान में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, जो राष्ट्रीय और वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने में सहायक हैं।
सफलता की कहानियाँ (Success Stories)
PURSE कार्यक्रम वीडियो
- वीडियो – MG University में DST द्वारा लागू PURSE कार्यक्रम की सफलता की कहानी
- वीडियो – PAU, लुधियाना (पंजाब कृषि विश्वविद्यालय) में DST द्वारा लागू PURSE कार्यक्रम
अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें:
डॉ. प्रतिष्ठा पांडे
वैज्ञानिक जी एवं प्रमुख, अनुसंधान एवं विकास अवसंरचना प्रभाग
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग
टेक्नोलॉजी भवन
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| 1 | डॉ. शिवप्रसाद | वैज्ञानिक – बी | 011-29512324 Extn: 12051 | अनुसंधान और अवसंरचना प्रभाग, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, टेक्नोलॉजी भवन, नई महरौली रोड, नई दिल्ली – 110016 | shiva[dot]prasad[at]nic[dot]in |













