नेशनल काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी कम्युनिकेशन एन सी एस टी सी

राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार हेतु राष्ट्रीय परिषद (एनसीएसटीसी) विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के संचार के लिए लोकप्रियता के लिए योजनाएं

राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद (एनसीएसटीसी) को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से संबंधित जानकारी से जनता के साथ संवाद करना, वैज्ञानिक और तकनीकी को प्रोत्साहन करना और पूरे देश में ऐसे प्रयासों को समंवित करने और प्रबंधन करना अनवार्य है। एनसीएसटीसी के कार्यक्रमों का उददेश्य समाज में वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देना और तर्कसंगत निर्णय लेने की क्षमता का निर्माण करना है। यह एक वैज्ञानिक तरीके से वैज्ञानिक ज्ञान के प्रसार के द्वारा सामाजिक उत्थान की ओर समर्पित है और यह विभिन्न मीडिया की मदद से कार्यक्रम तैयार कर समाज के हर कोने में फैलाता है।

एनसीएसटीसी केंद्रित आउटरीच गतिविधियां, विज्ञान और प्रौदयोगिकी संचार में प्रशिक्षण, विकास, विज्ञान और प्रौदयोगिकी साॅफ्टवेयर का उत्पादन और प्रसार, प्रोत्साहनपरक कार्यक्रम और क्षेत्र आधारित विज्ञान काम परियोजनाएं, विज्ञान और प्रौदयोगिकी संचार में अनुसंधान, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, छात्रों और अध्यापकों को प्रेरित करना, विशेष रूप से महिलाओं के लिए एक विशेष घटक के साथ पर्यावरण जागरूकता और कार्यक्रम।

इसमे कुछ महत्त्वपूर्ण सफल यात्राएं - पिछले वर्षो के अभियानों में वैज्ञानिक जागरूकता, भौतिकी का वर्ष, खगोल विज्ञान का वर्ष, गति का वर्ष, राष्ट्रीय विज्ञान दिवस और राष्ट्रीय गणित दिवस का निरीक्षण राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस, राष्ट्रीय शिक्षक विज्ञान कांग्रेस और विज्ञान एक्सप्रेस शामिल है।

 एन.सी.एस.टी.सी. द्वारा एक बहुपक्षीय प्रयास विकसित किया गया जिसमें शामिल हैं:

  • जनसंचार माध्यमों का उपयोग कर विज्ञान का संचार/प्रसार;
  • विज्ञान संचार और लोकप्रियकरण के लिए जन संपर्क और डिजीटल मीडिया का उपयोग;
  • विज्ञान और प्रौदयोगिकी लोकप्रियता में सोशल मीडिया का उपयोग

 

विभाग की कुछ महत्त्वपूर्ण पहल:- 

प्रमुख कार्यक्रमः

सांइस एक्सप्रेस एक अद्वितीय मोबाइल विज्ञान प्रदर्शनी है जो कोच, एसी (वातानुकूलित) कोच युक्त रेल पर आधारित है, और यह 2007 से भारत भर में यात्रा कर रही है। सांइस एक्सप्रेस द्वारा शुरूआती चार वर्षों के लिए विज्ञान की आकर्षक दुनिया, ग्राउंड ब्रैकिंग क्वेस्ट, अत्याधुतिक विज्ञान और भविष्य उन्मुख प्रौदयोगिकियों का प्रदर्षन किया। 2012 में पुनः साइंस एक्सप्रेस को ‘जैवविविधता‘ विशय पर डिजाइन किया गया और 3 वर्षो तक यह विज्ञान जैवविविधता विशेष (एस.ई.बी.एस) के रूप में चल रहा था, जिसका उद्ेश्य भारत की जैवविविधता पर जागरूकता उत्पन्न करना था। सांइस एक्सप्रेस ने देशभर में 1,22,000 कि.मी. से अधिक हिस्से को कवर किया है, जिसमें 1,404 दिनों में, 391 पडावों पर लगभग 1.33 करोड़ (13.3 मिलियन) आगंतुकों ने इसका अवलोकन किया है। इस प्रकार यह दुनिया में सबसे बडा, सबसे लंबी चलने वाली और सबसे अधिक देखी जाने वाली मोबाइल विज्ञान प्रदर्शनी बन गयी है और इसके कई रिकाॅर्ड भी बन गए है। परिर्वन विषेश के रूप में सांइस एक्सप्रेस का अगला चरण चल्द ही आ रहा है। अधिक जानकारी के लिए हमारी वेबसाईट पर जाएं। www.sciencexpress.in

 

  • राष्ट्रीयबाल विज्ञान कांग्रेस:

यह प्रतिभाशाली युवा वैज्ञानिकों (10.17 आयु वर्ग) के लिए एक अवसर है, इसे विज्ञान के तरीकों को निम्नलिखित चरणों के साथ लोकप्रिय बनाने के लिए वर्ष 1993 से शुरू किया गया है।

  • एक चयनित विशय पर एक गाइड के मार्गदर्शन में समूह में कार्य करते हैं।
  • अपने आस पास से एक समस्या का चयन किया जाए।
  • एक परिकल्पना विकसित करें और क्षेत्र अनुसंधान आयोजित करें।
  • डेटा में पैटर्न देखकर एक रिपोर्ट तैयार करें।
  • विशेषज्ञ समूह से पहले अपनी भाषा में वर्तमान निष्कर्ष।

जिला विज्ञान कांग्रेस, राज्य विज्ञान कांग्रेस और राष्ट्रीय सम्मलेन के लिए अभिनव परियोजनाओं को चुना जाता है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस के वार्षिक सत्र मे प्रत्येक राज्य दो प्रतिनिधियों को भी भेजता है।
एन सी एस सी हर साल लगभग सभी जिलों में आयोजित किया जाता है जिसमें अधिक से अधिक स्कूल गतिविधियों में शामिल हो रहे हैं। कई संगठनों के लिए एक गतिविधि पुस्तक का विकास, गाइड शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण कार्यशालाएं, अनुसंधान परियोजनाओं का मूल्यांकन और जिला एवं राज्य स्तरीय सम्मेलनों के समन्वय का अनुभव समृद्ध कर रहे हैं। पूरे देश में 10 लाख से अधिक बच्चे इस गतिविध में हिस्सा ले रहे हैं। पिछले वर्षों में चुने गए विशयों के साथ राष्ट्रीय कार्यक्रम निम्नानुसार है:

क्र. सं.

वर्ष

राज्य/ कें. प्र.

जिला/शहर

गतिविधि का नाम

1

2009-10

गुजरात

अहमदाबाद

पृथ्वी गृहः हमारे घर की खोज षेयर और केयर

2

2010-11

तमिलनाडु

चेन्नई

भूमि संसाधनः समृद्धि के लिए उपयोग और भावी पीढ़ी के लिए जतन

3

2011-12

राजस्थान

जयपूर

भूमि संसाधनः समृद्धि के लिए उपयोग और भावी पीढ़ी के लिए जतन

4

2012-13

उत्तर प्रदेश

वाराणसी

उर्जाः अन्वेशन, दोहन और संरक्षा

5

2013-14

मध्य प्रदेश

भोपाल

उर्जाः अन्वेशन, दोहन और संरक्षा

6

2014-15

कर्नाटक

बेंगलुरू

सौर और जलवायु की समझ

  • राष्ट्रीय विज्ञान दिवसः

हर साल 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के रूप में मनाया जाता है।   यह कार्यक्रम पूरे देश में विज्ञान लोकप्रियकरण गतिविधियो को ट्रिगर करने और देश के नागरिकों के बीच विज्ञान और प्रौद्योगिकी के वर्तमान मुद्दों के बारें में वैज्ञानिक जानकारी को प्रसारित करने हेतु विभाग द्वारा शुरू किया गया है।  कार्यक्रमों की शुरूआत राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के आस पास होती है और इसको केंद्रीय विशय के रूप में रखकर व्याख्यान, प्रश्नोत्तरी रेडियो, टेलीविजन शो, ओपेन हाउस चर्चा आदि गतिविधियाँ आयोजित की जाती हैं।  
यह कार्यक्रम देश भर में राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिशद्, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के माध्यम से आयोजित किए जाते है।

प्रभावी विज्ञान संचार द्वारा समुदाय के सीखने, लोगों के ज्ञान और संसाधनों तक पहंुचने और सामाजिक प्रतिमानों के तरीकों को बदल सकता है। पारिस्थितिक संसाधनों, आवास और पारिस्थितिक तंत्र के प्रबंधन को केंद्र में रखकर विज्ञान हमारे कल्याण और कार्य करने की क्षमता को बढ़ाता है। इस प्रकार यह सामाजिक, आर्थिक और पारिस्थितिक प्रकृति के जटिल जीवन चक्र की की आवश्यकताओं और जटिलताओं को संबोधित करता है। आज तेजी से विकसित हो रही दुनिया में मीडिया की भूमिका चाहे मुद्रित और इलेक्ट्राॅनिक दोनों रूपों में इन लक्ष्यों को आगे बढ़ाना है जो कि महत्त्वपूर्ण है। विज्ञान मीडिया और इको के रूप में अगला युवा नेतृत्व और सूचित विकल्प और निर्णय लेने को बढ़ावा देना, प्रत्यक्ष और उद्देश्यपूर्ण संचार प्रतिमान का समर्थन करना इस पहल का उद्देष्य है। इको मीडिया एवं इको नेक्स्ट पहल मुख्यतः प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण हेतु एकीकृत प्रयासों को बढ़ावा देने के लिए वास्तविक समय की प्रतिक्रिया और पर्यावरण मीडिया लीवरेज को बढ़ावा देने पर केंद्रीत है। विषेश रूप से उद्देष्य -

  • विज्ञान संचार पर आधारित सार्वजनिक मार्गदर्शन प्रणालियों में मॉडल विकसित करना, जैसे क्रियाशील सीखने के लिए स्थान विशिष्ट अभिनव पहल और ज्ञान महत्वपूर्ण डोमेन में वैज्ञानिक और सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने के लिए क्षेत्र क्षमता का निर्माण।
  • वैज्ञानिक दृष्टिकोण की ^being-on-their.own* और ^Collective Response^ के द्वारा चुनौतियों और स्थान विशिष्ट समस्याओं का सामना करने के आधार पर ज्ञान के द्वारा युवाओं में नेतृत्त्व और विशिष्ट लक्ष्य समूहों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार के ज्ञान को प्रेरित करना।
  • भारत सरकार की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं जैसे स्वच्छ भारत, सुरक्षित जल तक पहंुच, नदियों के पारिस्थितिक स्वास्थ्य इत्यादि की सेवा करना , आदि।

 

  • विज्ञान और प्रौदयोगिकी संसाधनों और सतत विकास के संरक्षण के लिए जारूकता - STARS (स्टार्स)

मौसम, जलवायु परिवर्तन और आपदा तैयारियों को समझने के लिए राष्ट्रव्यापी प्रशिक्षण सह जागरूकता कार्यक्रम; ग्रामीण विज्ञान जागृति-[PDF]0 bytes: कीटनाशकों, उर्वरकों, उमस्टिफिकेशन और मादा भ्रूण, खादय सुरक्षा, आनुवंशिक रूप से सशोधित फसलों के बारे में जागरूकता निर्माण से संबंधित तर्कसंगत उपयोग पर यह कार्यक्रम है।
एनसीएसटीसी की भारत नवाचार पहल - i3 नामक एक सार्वजनिक - निजी भागीदारी (पीपीपी) की पहल है। पूरे देशभर से हर साल सैकडों नवाचार प्राप्त हो रहे है,जिनमें जीवन विज्ञान, इलेक्ट्राॅनिक्स ओर संचार, ऊर्जा और इंजीनियरिंग प्रौदयोगिकी जैसे विभिन्न क्षेत्रों के विद्यार्थियों उद्योग पेशेवरों व्यक्तिगत और जमीनी स्तर पर अविष्कारों का निर्माण करने वाले योगदानकर्ता षामिल है। यह एक राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता है जो देश में विज्ञान और प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने की भावना रखती है। जिसके लिए एमईसीटीई द्वारा मंजूरी प्राप्त नामांकित संस्थानों के विद्यार्थी तथा अन्य विद्यार्थी पात्र हैं। अधिक जानकारी के लिए कृपया देखें। to [PDF]62.86 KBhttp://www.ciiinnovation.in

 

  • राष्ट्रीय शिक्षक विज्ञान कांग्रेस (एनटीएससी)

एनसीएसटीसी द्वारा शुरू किया गया एनटीएससी नामक एक मंच है जो देश के शिक्षकों को अपने स्तर पर वैज्ञानिक जागरूकता फैलाने में कार्य करता है। एनसीएसटीसी द्वारा शुरू किया गया एनटीएससी नामक एक मंच है जो देश के शिक्षकों को अपने स्तर पर वैज्ञानिक जागरूकता फैलाने में कार्य करता है। इसके अलावा शिक्षकों, व्यावसायिक शिक्षकों/खुले विद्यालयों/शिक्षकों/डीआईईटी (क्प्म्ज्) संकाय/बी. एड और विश्वविद्यालयी शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों, प्रौद्योगिकीविदों और शोधार्थी भी अपने षोध पत्र प्रस्तुत करने के लिए पात्र है। 

  • गणित जागरूकता संसाधन और उपक्रम (एम.ए.आर.आई)

इस उपक्रम में गणित को सीखने और सर्वोत्तम शिक्षण अभ्यास और संसाधन व्यक्तियों के परिचय से लेकर, गणित सिखने के लिए सकारात्मक दृष्ठिकोण को उत्साहित करने, प्रेरित करने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों के द्वारा प्रोत्साहित किया जाता है। गणित विकास में प्रशिक्षण, शिविरों के माध्यम से सेवारत शिक्षकों और छात्रों की क्षमता निर्माण करना; गणित और अनुसंधान क्षेत्र से संबंधित क्षेत्रों के लिए पोस्टर, गणित किट संसाधन मैनुअल, पुस्तिकाएँ, माॅडल इत्यादि शिक्षण सामग्री का निमार्ण षामिल है।
उत्पादन और प्रसार 1 वर्ष 2012 से पूरे देश में राज्य विज्ञान एंव प्रौद्योगिकी परिशदों की मद्द से महान गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन जन्मदिवस को ‘‘राष्ट्रीय गणित दिवस’’ के रूप में मनाया जाता है।

यह एक ऐसा एक्सपीयर है जो लक्ष्याधारित प्रशिक्षण माॅडयूल है जो बुनियादी कौशल प्रदान करता है और विज्ञान के पीछे के चमत्कारों की जांच करता है। देवताओं द्वारा ये तथाकथित चमत्कार बताए जाते हैं लेकिन तथ्य यह है कि सभी चमत्कार विज्ञान के विभिन्न सिद्धांतों पर आधारित हैं। 

  • प्रेरक कार्यक्रम:

प्रतिभाषाली विद्यार्थीयों को विज्ञान में कैरियर चुनने हेतु प्रोत्साहित करने के लिए देश में विभिन्न प्रयोगशालाओं, विश्वविद्यालयों और वैज्ञानिक संस्थानों में किए जा रहे विज्ञान ओर प्रौद्योगिकी से संबंधित कार्यो के बारें में उन्हें संवेदन शील एवं जागरूक बनाना जरूरी है।

  प्रतिभाषाली विद्यार्थियों को विज्ञान में कैरियर चुनने हेतु राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिशद्, नई दिल्ली द्वारा विभिन्न अनुसंधान प्रयोगशालाओं, विश्वविद्यालयों, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद और रुचि रखने वाले अन्य विज्ञान संस्थानों में पे्ररक कार्यक्रमों के आयोजन के प्रस्ताव आमंत्रित किए जा रहे हैं।
मुख्य कार्यः हमारा मुख्य उद्देष्य विद्यार्थीयों में शुद्ध विज्ञान के रूप में शैक्षिक और कैरियर विकल्प को चुनने में जागरूकता एवं रूचि निर्माण करना। विद्यार्थीयों को विज्ञान और प्रौद्योगिकी से संबंधित चल रहे कार्यों के साथ एक जोखिम भरे विभिन्न परिष्कृत उपकरणों, विज्ञान और प्रौद्योगिकी प्रयोगशालाओं में उपलब्ध सुविधाओं से अवगत कराना।;
अवधिः इस कार्यक्रम का अवधि एक सप्ताह है, जिसमें एक दिन माता पिता के लिए खुला घर और अन्य लक्षित समूह यह कार्यक्रम अत्यधिक इंटरैक्टिव और अधिमानतः आवासीय होता है।
लक्ष्य: विज्ञान षाखा की पृष्ठभूमि रखने वाले कक्षा 10वीं एवं 11वीं के विद्यार्थी (एक सप्ताह का कार्यक्रम) शिक्षक एवं अभिभावक (एक दिन के लिए लंबे समय से बातचीत केवल)
एनसीएसटीसी के समय के अनुसार प्रस्ताव आमंत्रित किए जा रहे हैं; जैसे विश्वविद्यालयों, प्रयोगशालाओं, समन्वय क्षेत्र एजेंसियों के लिए वर्ष के अप्रैल और अक्टूबर माह में। एनसीएसटीसी द्वारा प्रदान किए गए दिशा निर्देशों और प्रारूप में ही प्रस्ताव प्रस्तुत किए जाएं।

 

  • पुरस्कार एवं मान्यताएँ:

 

व्यक्तियों और संस्थानों द्वारा विज्ञान संचार के लिए किए गए अभूतपूर्व योगदान के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं। निम्नलिखित श्रेणियों में पुरस्कारों के लिए नामांकन आमंत्रित किए जा रहे हैं-

  • विज्ञान और प्रौदयोगिकी संचार में उत्कृष्ट प्रयास     - (दो लाख रूपए)
  • पुस्तकों और पत्रिकाओं के माध्यम से विज्ञान और प्रौद्योगिकी संचार में उत्कृष्ट प्रयास  & - (रूपए एक लाख)
  • बच्चों के बीच विज्ञान और प्रौदयोगिकी की लोकप्रियता बढ़ाने में उत्कृश्ठ प्रयास -          - (रूपए एक लाख)
  • लोकप्रिय विज्ञान और प्रौद्योगिकी साहित्य के अनुवाद में उत्कृष्ट प्रयास -        - (रूपए एक लाख)
  • प्रिंट माध्यम में विज्ञान और प्रौद्योगिकी साहित्य के अनुवाद में उत्कृष्ट प्रयास -    - (रूपए एक लाख)
  • इलेक्ट्राॅनिक माध्यम में विज्ञान एवं प्रौदयोगिकी संचार में उत्कृष्ट प्रयास -  - (रूपए एक लाख)

प्रत्येक पुरस्कार में एक आकर्षक नकद पुरस्कार, एक स्मृति चिन्ह और एक स्क्राॅल षामिल है, जो हर साल 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर राष्ट्रीय समारोह में प्रस्तुत किया जाता है।

वर्ष 2019 के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी के लोकप्रियकरण पर राष्ट्रीय पुरस्कार [PDF]342.62 KB

वर्ष 2019 के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी लोकप्रियकरण पर राष्ट्रीय पुरस्कारों के लिए आवेदन प्रारूप और दिशानिर्देश[PDF]0 bytes

यूनेस्को कलिंग पुरस्कार, युनेस्कोे द्वारा विज्ञान के लोकप्रियकरण के लिए लोगों द्वारा वैज्ञान विचार प्रस्तुत करने में असाधारण कौशल के लिए प्रदान किया जाता है। यह पुरस्कार उडीसा के मुख्यमंत्री माननीय श्री बिजू पटनायक और कलिंग फाउंडेशन ट्रस्ट, भुवनेष्वर के संस्थापक अध्यक्ष द्वारा दिए गए दान के बाद 1951 से बनाया गया है। उम्मीदवारों द्वारा विज्ञान की लोकप्रियता बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। आज तक चैबीस देषों के पचास व्यक्तियों को यह पुरस्कार मिला है जिनमें से छह नोबल पुरस्कार विजेता भी रहे हैं।

उपलब्धियाँ

कई महत्वपूर्ण उपक्रमों ने देश को समृद्ध लाभांश दिया है। इनमें शामिल हैं-

ऑडियो/रेडियो कार्यक्रम
ऑल इंडिया रेडियो (एआईआर) के 119 स्टेशनों और सामुदायिक रेडियों के माध्यम से विभिन्न विशयों पर विज्ञान आधारित रेडियो धारावाहिकों का उत्पादन और प्रसारण किया जाता है। जिनमें कुछ लोकप्रिय धारावाहिक भी हैंः ‘‘जीवन एक रूप अनेक’’, ‘‘रहिये मतवाले‘‘, ‘‘आंखों के खिलाड़ी‘‘, ‘‘रेडियो गणित (सामुदायिक रेडियो पर)

वीडियो कार्यक्रम-
वीडियो कार्यक्रम तैयार कर दूरदर्षन पर प्रसारित किए गए। जिनमें चैलेंज चटनी, ‘उत्थान’, इग्निटेड, जीवों में संस्मरण आदि शामिल है। भारत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी की उपलब्धियों पर वीडियो सी. डी. का विकास और प्रसारण किया गया है।

वेब आधारित कार्यक्रम

  • गणित पर इंटरेक्टिव वेब पोर्टल
  • पृथ्वी ग्रह पर बेब पोर्टल

महाराष्ट्र राज्य में गणित यात्रा
क्षेत्रीय जाथा एनसीएसटीसी के समर्थन से महाराष्ट्र राज्य के आदिवासी जिलों में एक राज्य स्तरीय अभियान ‘गणित यात्रा’ के रूप में आयोजित किया गया। जिसके लिए संसाधन सामग्री के रूप में नाटक, सी.डी., गणित गीत, पुस्तिकाएँ, कैलेंडर आदि बनाये गए थे।

प्रशिक्षण नियमावली और किट का विकासः
गणित किट, मौसम किट, सरल कार्य - ग्रेट कांसेप्ट, विद्यार्थीयों के लिए लेजर किए, पारखी, सूक्ष्मजीवों पर माॅडयूल, वर्मी कम्पोस्टिंग, खगोल विज्ञान किट, जैवविविधता किट इत्यादि का बच्चों के बीच निर्माण किया जाता है और उन्हें प्रसारित किया जाता है।

परिणाम: विज्ञान और प्रौद्योगिकी संचार के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार 2016

प्रारूप और कार्यक्रम

 एनसीएसटीसी के लिए सामान्य दिशा-निर्देश-[PDF]568.25 KB

एनसीएसटीसी कार्यक्रमों के लिए पद स्वीकृति विवरण भरने के लिए दिषा-निर्देश-[PDF]139.87 KB

जी. एफ. आर. 19। -[PDF]14.66 KB

उपयोग प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने के लिए संषोधित दिशा-निर्देश-[PDF]135.86 KB

कार्यक्रम समर्थित नहीं है [PDF]267.86 KB

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस - 2018 के लिए थीम (षीर्षक) -‘‘भविष्य के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी’’

एनसीएसटीसी में प्रस्तावों की प्राप्ति के लिए समय रेखा शुष्क/अतिशुष्क और षीत मरुस्थल क्षेत्र ASACODER के लिए समन्वय कार्यक्रम में पहल (नया)[PDF]194.83 KB

वर्षवार परियोजना सूची-

2004-05[PDF]0 bytes | 2005-06[PDF]0 bytes | 2006-07[PDF]0 bytes | 2007-08[PDF]0 bytes | 2008-09[PDF]0 bytes | 2009-10[PDF]153.9 KB | 2010-11[PDF]0 bytes | 2011-12[PDF]0 bytes | 2012-13[PDF]0 bytes | 2013-14[PDF]0 bytes | 2014-15 [PDF]0 bytes| 2015-16 [PDF]0 bytes| 2016-17 [PDF]134.62 KB

 अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें :

श्री चंदर मोहन
वैज्ञानिक - जी & Head

राष्ट्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी संचार परिषद
(राष्ट्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी संचार परिषद)
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग
प्रौद्योगिकी भवन, न्यू महरौली मार्ग,
नई दिल्ली 110016
फ़ोन: 011-26590355