विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के स्वायत्त संस्थान (एआई) प्रभाग को विभाग के अंतर्गत 24 स्वायत्त संस्थानों (14 आरएंडडी संस्थान, 02 सेवा संगठन और 04 वृत्तिक निकाय/विज्ञान अकादमियां और 03 सांविधिक बोर्ड) के प्रशासन की देखभाल का दायित्व सौंपा गया है।
डीएसटी द्वारा प्रशासित स्वायत्त संस्थानों (एआई) को सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, भारतीय न्यास अधिनियम या संसद के किसी अधिनियम के अधिनियमन द्वारा स्थापित किया गया है। लंबे और संजोए इतिहास और विविधतापूर्ण गतिविधियों वाले इन संस्थानों का देश के एसएंडटी पारितंत्र में महत्वपूर्ण स्थान है। इनमें से अधिकांश डीएसटी के अस्तित्व में आने से पूर्व स्थापित किए गए थे। इनमें से कई का इतिहास स्वतंत्रता से भी पहले का है। जब कभी यह महसूस किया गया कि थोड़ा स्वतंत्र रूप से और सरकारी तंत्र के दिनानुदिन हस्तक्षेप के बिना सरकारी संरचना से बाहर कतिपय विशिष्ट कार्यों का निर्वहन किए जाने की आवश्यकता है, कुछ स्वायत्त संस्थानों की स्थापना की गई। इनमें से कुछ का राज्य सरकारों द्वारा अधिग्रहण कर लिया गया।
ये स्वायत्त संस्थान काफी हद तक भारत सरकार के सहायता अनुदान पर निर्भर करते हैं। नीतियों के लिए कार्यढांचा तैयार करने, वैज्ञानिक विषयों और प्रौद्योगिकियों में अनुसंधान संचालित करने जैसी विविध गतिविधियों में संलग्न होने के कारण ये संस्थान डीएसटी के कार्यकरण में प्रमुख हितधारक हैं।
इन 24 स्वायत्त संस्थानों की संक्षिप्त पृष्ठभूमि नीचे प्रस्तुत की गई है।
- डीएसटी परिवार के 15 अनुसंधान संस्थान और एक वैधानिक निकाय श्री चित्रा तिरुनल इंस्टीट्यूट फॉर मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी (एससीआईएमएसटी) के हिस्से के रूप में कई दृष्टिकोणों से बहुत ही विशिष्ट समूह हैं। इनमें से कुछ देश के सबसे पुराने अनुसंधान संस्थानों में से हैं जिन्हें महेंद्र लाल सरकार, सीवी रमन, जेसी बोस, बीरबल साहनी और डीएन वाडिया आदि जैसे प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों और हस्तियों द्वारा स्थापित किया गया था। इनमें से कुछ संस्थान बहुत ही प्राचीन और मूल्यवान वैज्ञानिक डेटा का निधान हैं और खगोल विज्ञान एवं खगोल भौतिकी, भू-चुंबकत्व, उन्नत सामग्री तथा नैनो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – आदि जैसे विशिष्ट क्षेत्रों में राष्ट्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। एससीटीआईएमएसटी-त्रिवेंद्रम और एआरसीआई-हैदराबाद को छोड़़कर शेष संस्थान मौलिक अनुसंधान संस्थान हैं। एससीटीआईएमएसटी-त्रिवेंद्रम स्वदेशी जैव-चिकित्सा उपकरण विकास के क्षेत्र में राष्ट्रीय पथप्रदर्शक है जिसने देश में स्वास्थ्य देखभाल की लागत को कम करने में सहायता प्रदान की है। कोविड-19 महामारी के क्रियाकलाप में, एससीटीआईएमएसटी ने कई उत्पादों के विमोचनार्थ फास्ट ट्रैक पद्धति तैयार की है, जिनमें से कुछ का पहले ही व्यवसायीकरण किया जा चुका है और कोविड-19 महामारी के प्रबंधन के लिए उपयोग किया जा रहा है। एआरसीआई-हैदराबाद ने उन्नत सामग्री के क्षेत्र में प्रमुख प्रौद्योगिकी विकास और अंतरण संगठन के रूप में अपने लिए बहुत ही विशेष स्थान बनाया है। इन अनुसंधान संस्थानों के पास अपने वैज्ञानिकों और अपने आविष्कारों द्वारा अर्जित अनुसंधान प्रकाशनों और पुरस्कारों तथा सम्मानों का प्रभावशाली पोर्टफोलियो है।
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देश के सभी 04 प्रमुख विज्ञान और इंजीनियरिंग पेशेवर निकाय, अर्थात् आईएनएसए-दिल्ली, आईएएस-बैंगलोर, एनएएसआई-इलाहाबाद और आईएससीए-कोलकाता डीएसटी परिवार के हैं। इनमें से अधिकांश प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों और व्यक्तियों द्वारा स्थापित बहुत पुराने संगठन हैं, जिनमें भारतीय विज्ञान कांग्रेस एसोसिएशन भी शामिल है, जो एक सदी से भी अधिक पुराना है।ये पेशेवर निकाय, अपनी विविध गतिविधियों के माध्यम से, एस एंड टी से संबंधित राष्ट्रीय महत्व के नीतिगत मुद्दों पर विचार-विमर्श करते हैं और पत्रिकाओं, बैठकों, सम्मेलनों, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक-विनिमय कार्यक्रमों के माध्यम से वैज्ञानिक ज्ञान के प्रसार में मदद करते हैं।हाल के दिनों में, वे देश में युवा छात्रों और विज्ञान शिक्षकों पर केंद्रित विशेष मानव संसाधन विकास कार्यक्रमों के लिए महत्वपूर्ण माध्यम बने हैं।
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02 विशेष ज्ञान संस्थान और एस एंड टी सेवा संगठन - नेक्टर और एनआईएफ – अपने आप में अद्वितीय हैं। नेक्टर पूर्वोत्तर राज्यों की विशिष्ट समस्याओं के समाधान खोजने के लिए प्रौद्योगिकियों के प्रापण में अद्वितीय है और एनआईएफ अद्वितीय निकाय है जो आधारभूत नवाचारों की तलाश करता है और उन्हें व्यवहार्य, प्रौद्योगिकी सहायित उत्पादों या प्रक्रियाओं में विकसित करने में सहायता प्रदान करता है। आज की तारीख तक एनआईएफ ने चौदह राज्यों के 58 नवोन्मेषकों की 78 प्रौद्योगिकियों के अधिकार प्राप्त कर लिए हैं।
संस्थानों की सूची उनकी गतिविधियों सहित नीचे दी गई है:
| क्रम सं. | स्वायत्त निकाय का नाम | क्रियाकलाप |
| एमएसीएस –अघारकर अनुसंधान संस्थान (एआरआई ), पुणे | जैव विविधता, जैव ऊर्जा, बायोप्रॉस्पेक्टिंग, विकासात्मक जीव विज्ञान, आनुवंशिकी और पादप पालन और नैनो-बायोसाइंस के क्षेत्रों में मौलिक और अनुप्रयुक्त अनुसंधान। |
| आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान अनुसंधान संस्थान (एरीज), नैनीताल | खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी, सौर भौतिकी और वायुमंडलीय विज्ञान में बुनियादी अनुसंधान। देश में विशालतम ऑप्टिकल टेलीस्कोप (3.6 मीटर) और अन्य छोटे ऑप्टिकल टेलीस्कोप और बड़े पैमाने पर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय द्वारा खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी अनुसंधानार्थ संबद्ध इंस्ट्रूमेंटेशन का संचालन करना। |
| बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान (बीएसआईपी), लखनऊ | पुराविज्ञान और संबद्ध पृथ्वी प्रणाली विज्ञान के मौलिक और अनुप्रयुक्त पहलुओं पर बहु-विषयात्मक बुनियादी अनुसंधान। |
| बोस संस्थान (बीआई), कोलकाता | जीव विज्ञान, भौतिकी और रसायन विज्ञान के उदीयमान क्षेत्रों में बुनियादी अनुसंधान। इसके अतिरिक्त, प्रत्यक्ष सामाजिक लाभ का ग्रामीण जैव प्रौद्योगिकी कार्यक्रम है। |
| नैनो और मृदु सामग्री विज्ञान केंद्र (सीईएनएस), बेंगलुरु | नैनो सामग्री, तरल क्रिस्टल, जैल, झिल्ली और संकर सामग्री में बुनियादी और अनुप्रयुक्त अनुसंधान। |
| इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टिवेशन ऑफ साइंस (आईएसीएस), कोलकाता (एक डीम्ड-टू-बी-यूनिवर्सिटी) | भौतिकी, रसायन विज्ञान और जीव विज्ञान और अन्य उदीयमान अंतरविषय क्षेत्रों की अग्रवर्ती समस्याओं में बुनियादी अनुसंधान। |
| नैनो विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान, (आईएनएसटी), मोहाली | नैनोविज्ञान और नैनो प्रौद्योगिकी में बुनियादी और अनुप्रयुक्त अनुसंधान। |
| विज्ञान और प्रौद्योगिकी उन्नत अध्ययन संस्थान(आईएएसएसटी), गुवाहाटी | पूर्वोत्तर क्षेत्र हेतु प्रासंगिक विशिष्ट विषयों पर वैज्ञानिक जांच सहित भौतिक और जीवन विज्ञान में बुनियादी और अनुप्रयुक्त अनुसंधान। |
| भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (आईआईए), बेंगलुरु | खगोल भौतिकी और संबद्ध विषयों की सभी शाखाओं में बुनियादी अनुसंधान। खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी में अनुसंधानार्थ उन्नत प्रेक्षण सुविधाओं का रखरखाव । |
| भारतीय भू-चुंबकत्व संस्थान (आईआईजी), मुंबई | भू-चुंबकत्व और संबद्ध क्षेत्रों में बुनियादी और अनुप्रयुक्त अनुसंधान। भू-चुंबकत्व और संबद्ध क्षेत्रों से संबंधित स्थायी वेधशालाओं का व्यवस्थापन। |
| अंतर्राष्ट्रीय चूर्ण धात्विकी और नव सामग्री उन्नत अनुसंधान केंद्र (एआरसीआई), हैदराबाद | नई सामग्रियों और प्रक्रियाओं पर अनुप्रयुक्त अनुसंधान और विकास; प्रोटोटाइप और पायलट पैमाने पर सामग्री प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन और उद्योग को इसका अंतरण। |
| जवाहरलाल नेहरू उन्नत वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र (जेएनसीएएसआर), बैंगलोर (डीम्ड-टू-बी-यूनिवर्सिटी) | विज्ञान और इंजीनियरिंग जैसे रसायन विज्ञान, भौतिकी, पदार्थ विज्ञान, नैनोसाइंस, आणविक जीव विज्ञान, क्रोनोबायोलॉजी, पारिस्थितिकी, तंत्रिका विज्ञान, इंजीनियरिंग यांत्रिकी और भूगतिकी, के कई क्षेत्रों में बुनियादी अनुसंधान और शिक्षण। |
| रामन अनुसंधानसंस्थान (आरआरआई), बेंगलुरु | खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी, प्रकाश और पदार्थ भौतिकी, मृदु संघनित पदार्थ और सैद्धांतिक भौतिकी के क्षेत्रों में बुनियादी अनुसंधान। |
| श्री चित्रा तिरुनाल आयुर्विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान (एससीआईएमएसटी), तिरुवनंतपुरम (संसद के अधिनियम के तहत राष्ट्रीय महत्व का संस्थान) | स्वदेशी और सस्ती जैव-चिकित्सा प्रौद्योगिकी का अनुसंधान एवं विकास और इसका उद्योग में अंतरण ह्द्वाहिका और तंत्रिका रोगों में उच्च गुणवत्ता वाली रोगी देखभाल, उन्नत चिकित्सा डिग्री के लिए शिक्षण और चिकित्सा विज्ञान और सार्वजनिक स्वास्थ्य में अनुसंधान। |
| सत्येन्द्र नाथ बोस राष्ट्रीय मौलिक विज्ञान केंद्र (एसएनबी), कोलकाता | भौतिकी, रसायन विज्ञान और खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी के कई क्षेत्रों में बुनियादी अनुसंधान। |
| वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान (डब्ल्यूआईएचजी), देहरादून | हिमालय के भूविज्ञान पर बुनियादी और अनुप्रयुक्त अनुसंधान। |
| भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (आईएनएसए), दिल्ली | फैलोशिप के माध्यम से भारत के कुछ सबसे कुशल वैज्ञानिकों और प्रौद्योगिकीविदों का राष्ट्रीय कॉलेजियम। विज्ञान अनुसंधान, विज्ञान नीतियों, आउटरीच और प्रशिक्षण का वृतांत। |
| राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (नासी), इलाहाबाद | वैज्ञानिकों के वैज्ञानिक योगदान को सम्मानित करने के लिए फैलोशिप प्रदान करना। विज्ञान नीतियां, आउटरीच और प्रशिक्षण। महत्वपूर्ण सामाजिक समस्याओं को हल करने के लिए वैज्ञानिक उपाय करके विज्ञान-समाज कड़ी को मजबूत करना। |
| भारतीय राष्ट्रीयअभियांत्रिकी अकादमी (आईएनएई), दिल्ली | इंजीनियरों के योगदान को सम्मानित करने के लिए फैलोशिप प्रदान करना। नीति पत्र और महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर सम्मेलनों और चर्चाओं का आयोजन और देश के लिए आवश्यक विज्ञान और प्रौद्योगिकी उपाय के लिए सुझाव, इंजीनियरिंग प्रशिक्षण और शिक्षा, आदि। |
| भारतीय विज्ञान कांग्रेस संस्थान (आईएससीए), कोलकाता | विज्ञान संचार और आउटरीच गतिविधियां देश में विज्ञान को आगे बढ़ाने और बढ़ावा देने और भारत के लोगों के बीच वैज्ञानिक सोच पैदा करने के लिए। |
| भारतीय विज्ञान अकादमी (आईएएस), बैंगलोर | फैलोशिप के माध्यम से भारत के कुशल वैज्ञानिकों और प्रौद्योगिकीविदों का राष्ट्रीय कॉलेजियम। उन्नत विज्ञान और इंजीनियरिंग पत्रिकाओं का प्रकाशन। विज्ञान नीतियां और आउटरीच। स्कूल और कॉलेज के छात्रों और शिक्षकों का प्रशिक्षण। |
| उत्तर पूर्वी प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग एवं प्रसार केंद्र ( नेक्टर ), शिलांग, मेघालय | पूर्वोतर में तकनीकी आर्थिक अंतराल की पहचान करना और वहॉं व्यवहार्य प्रौद्योगिकियों के प्रवर्तन से आर्थिक क्रियाकलाप को बढ़ावा देना और रोजगार की संभावनाओं में सुधार किया जाना। |
| राष्ट्रीयनवप्रवर्तन प्रतिष्ठान-इंडिया (एनआईएफ), अहमदाबाद | आधारभूत नवोन्मेषोंका पता लगाना,इन्हें चयनात्मक, समयबद्ध और मिशन-उन्मुख तरीके से निर्मित करना और बनाए रखना ताकि हमारे समाज की सामाजिक-आर्थिक और पर्यावरणीय आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके। |
| विज्ञान और इंजीनियरी अनुसंधान बोर्ड, नई दिल्ली (संसद के अधिनियम के तहत वैधानिक निकाय) | बहिष्प्राकार वित्त पोषण के माध्यम से बुनियादी अनुसंधान को बढ़ावा देना |













